कल मेरे एक जानपहचान वाले ने कहा "तुम ब्लॉग लिखती हो पर कमेंट्स तो 0 ही हैं इसका तात्पर्य है कोई तुम्हारे ब्लॉग नहीं पढ़ता तुम्हे निराशा नहीं होती "मैंने एक ही ज़बाब दिया"कितने लोगों की रचनाओं को पहचान लिखने के तुरंत बाद ही मिल गयी? रविन्द्रनाथ जी ने गीतांजलि जब लिखी तो क्या यह सोचा था कि उन्हें नोबल अवार्ड मिले या क्या उन्होंने उसके बाद कोई रचना नहीं लिखी ,अपनी लेखनी को दफ़न कर दिया अगर गांधीजी भी ऐसा ही सोचते कि मेरे अहिंसा की नीति को शांति का नोब्ल अवार्ड मिल जाये इसलिए मैं ये अपनाऊं तो क्या विश्व को इतना महान अहिंसा का पुजारी मिल सकता था क्या?उन्हें तो आज तक नोब्ले अवार्ड नहीं मिला कितने लोगों को मर्न्नोपरांत ही दुनिया जानती है और उन्हें अवार्ड मिलता है जब वे ऐसी दुनिया में जा चुके होते हैं जहाँ पारितोषिक.सराहना इत्यादि का कोई अर्थ नहीं पर जीवन भर उन्होंने आत्मसंतुष्टि के लिए अच्छा काम किया वही उनकी पहचान बनी .
कहने का अर्थ है कि हमें हमेशा अच्छा से अच्छा कार्य करते रहना चाहिए बिना किसी स्वार्थ भाव से समाज ,परिवार ,देश विश्व के लिए अगर हम कुछ कर सकते हैं तो वो तभी संभव है जब हम पहले अपनी आत्मसंतुष्टि के लिए काम करें .
कर सकोगे आस-पास के ,वातावरण को तुम सदाबहार
सजा सकते हो अवश्य इस, समाज को लगाकर चाँद चार
बस करो ना तुम कभी अपने, बहुमूल्य समय को बेकार
.आत्मसंतुष्टि जिसमे हो उसे कर ,बनाओ ये जीवन साकार
कहने का अर्थ है कि हमें हमेशा अच्छा से अच्छा कार्य करते रहना चाहिए बिना किसी स्वार्थ भाव से समाज ,परिवार ,देश विश्व के लिए अगर हम कुछ कर सकते हैं तो वो तभी संभव है जब हम पहले अपनी आत्मसंतुष्टि के लिए काम करें .
कर सकोगे आस-पास के ,वातावरण को तुम सदाबहार
सजा सकते हो अवश्य इस, समाज को लगाकर चाँद चार
बस करो ना तुम कभी अपने, बहुमूल्य समय को बेकार
.आत्मसंतुष्टि जिसमे हो उसे कर ,बनाओ ये जीवन साकार