आज मैं पश्चिम बंगाल के छोटे से स्थान में हूँ . यहाँ के शांत वातावरण ने मेरी लेखन क्षमता के बीज को एक उर्वर भूमि प्रदान की है.वैसे भी बंगाल की आबो-हवा साहित्यकारों , कवियों,चित्रकारों के सुंदर कृतियों से सुवासित है.शायद इस भूमि का ही वरदान है कि बचपन से लिखने की चाहत को आज जैसे पर लग गए हों .कलम जब चल पड़ती है तो जीवन के हर आयाम, हर पहलू को अपने शब्दों में समेट लेना चाहती है .इसलिए मैंने अपने सारे विचारों को इस ब्लॉग के जरिये आपके समक्ष लाना शुरू किया है.
किसी भी तरह की रचना तब तक अधूरी है जब तक उसकी आलोचना या सराहना न हो. सराहना पाने से जहाँ बल मिलता है वहीँ आलोचना से प्रेरणा मिलती है.इस धुप छाँव से कृति सजीव,सफल और सार्थक बनती है
आप सबसे गुजारिश है कि आप में से जो भी मेरी रचना पढ़े इसे सराहनाओं की दवा या आलोचनाओं के नश्तर से मेरी लेखन क्षमता का विकास करने में सहयोग दे.मेरा मानना है कि जब इन्सान का जन्म ही दवा और नश्तर के बीच होता है तो फिर इससे गुरेज क्यों?
जब-जब मेरी भावनाओं की बर्फ पिघलती है ये शब्द बन दुनिया के सामने आने को बेताब रहती है .इश्वर,समाज,प्रकृति,पर्यावरण,नैतिक और पारिवारिक मूल्य,देशभक्ति के सतरंगी किरणों को समेटे यह ब्लॉग इन्द्र धनुषी आभास दिलाने में कितना सफल होगा ये तो मैं नहीं जानती पर हाँ ये जरुर जानती हुईं कि मेरे हर ब्लॉग की लावण्यता उसके भावों में ही छुपी है .अपनी भावनाओं को आप तक पहुँचाने कि इस कोशिश में अगर कहीं भूल हो जाये तो उस भूल के लिए क्षमाप्रथिनी हूँ .
अपनी रचनाओं कि सुमन वाटिका से हर दिन एक सुमन आप सभी पाठकों के लिए .आशा है आप सब को कुछ सुमन अवश्य पसंद आयेगें .