Friday, October 12, 2012

श्रधांजलि

एक दोपहर जब एक बड़ी कंपनी के कर्मचारी लंच टाइम से वापस लौटे ,तो उन्हें एक मेल मिला ."उसमें लिखा था कि कल उनका एक साथी गुज़र गया जो उनकी तरक्की में बाधक था .श्रधांजलि सभा मीटिंग हॉल में रखी गई है."
पहले तो लोगों को जानकार दुःख हुआ उनका साथी नहीं रहा फिर वो उत्सुकता से सोचने लगे आखिर कौन था वह जो हम सब की तरक्की में बाधा बन रहा था.चलो अब वह नहीं रहा.जैसा कि अक्सर होता है लोग किसी के गुज़र जाने के बाद उसकी बुराइयां भी भूल जाते हैं ,इसलिए सब उसके जाने का अफ़सोस करने लगे.
हॉल में दरी बिछी थी और दीवार से पहले पर्दा लगा था.वहां एक सूचना लगी ,"गुज़रने वाले की तस्वीर परदे के पीछे दीवार पर लगी है.एक-एक कर आप जाएं उसे श्रधान्जली दें और फिर निश्चिंत होकर तरक्की की राह पर कदम बाधाएं क्योंकि अब तरक्की का वह बाधक नहीं रहा.सभी कर्मचारी तो बिलकुल हैरान थे.
वे एक-एक कर परदे के पीछे जाते और जब वे दीवार पर लगी तस्वीर देखते तो अवाक् रह जाते.उनके मुंह से बोल ही न निकलते .
दरअसल दीवार की जगह पर एक दर्पण(mirror )लगा था,जिसके नीचे लिखा था:"दुनिया में केवल एक ही व्यक्ति है जो आपकी तरक्की को रोक सकता है,आपको सीमाओं में बाँध सकता है और वह आप खुद हैं."
हॉल के बाहर बॉस कर्मचारियों का स्वागत कर कह रहा था,"अपने नकारात्मक पहलू (negative aspect) को श्रधांजलि दे चुके मेरे नए साथियों आपका स्वागत है."