Thursday, November 3, 2011

accha lagata hai

काले बादल,बरखा की बूंदें,निहारते रहना अच्छा लगता है.
अकेलेपन में उब जाना भी, कभी-कभी अच्छा लगता है.
तपती धरा को शीतल करने,मौसम चक्र चला करताहै
एक शहर को छोड़ दूजे शहर, जाना सही फैसला लगता है 
हर इन्सान की है वही कहानी,वह काम में ही उलझा रहता है
नयी jagah ,नए लोग,नयापन,कुछ पल ही भला लगता  है
चलते -चलते जो थक जाऊं ,यादों के साये ही भला लगता है
तन्हाई जब साथ हो मेरे,कविता लिखना अच्छा  लगता है
विचारों के पट खोल शब्द,रूबरू कागज के हुआ करता है
जीवन के छुए अनछुए पन्ने, पढ़ना कितना भला लगता है
जीवन संगीत का सुर जब.रोम-रोम में बसने लगता है
हर साज,हर आवाज़,फिर, सब कुछ यहाँ अपना लगता है
कविता के हर शब्द को,फिर अंतर्मन ही सुना करता है
भीगे पलकों को सबसे छुप , पोंछ लेना भला लगता है
हर्ष-विषाद की तिजोरी में,हर्ष का संचय ही भला लगता है
ख़ुशी भरे पलों के सहारे,सपने देखना बहुत अच्छा लगता है






BAL VIKAS

बच्चों को महान व्यक्तियों के उदहारण देकर उनके आदर्शों पर चलने की शिक्षा देना सर्वथा उचित है पर उनके जैसा ही बनकर दिखाने की शिक्षा से मैं सहमत नहीं हूँ .अगरभगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद  को हुबहू महात्मा गाँधी जैसा ही बनने की शिक्षा दी जाती तो हम इन जैसे कई  और  महान  व्यक्ति कभी नहीं पा सकते थे. 
मेरा मानना है कि हर बच्चे में कुछ अद्भुत प्रतिभा होती है जो उसे बहुत अच्छा बनने में कारगर साबित हो सकती है.जरुरत है बच्चों को उनके सम्पूर्ण विकास का अवसर दिया जाये, महान व्यक्तियों का उदाहरण  सिर्फ उनके आदर्शों तक ही सीमित रखा  जाये शेष हर बच्चे को उसकी स्वयं की क्षमता पहचानने का मौका दिया जाये जिससे हमारे समाज को बेहतर से बेहतर नेतृत्व हासिल हो सके.हर जगह,हर युग में कई प्रतिभाशाली महान लोग निखर कर उभरें .