काले बादल,बरखा की बूंदें,निहारते रहना अच्छा लगता है.
अकेलेपन में उब जाना भी, कभी-कभी अच्छा लगता है.
तपती धरा को शीतल करने,मौसम चक्र चला करताहै
एक शहर को छोड़ दूजे शहर, जाना सही फैसला लगता है
हर इन्सान की है वही कहानी,वह काम में ही उलझा रहता है
नयी jagah ,नए लोग,नयापन,कुछ पल ही भला लगता है
चलते -चलते जो थक जाऊं ,यादों के साये ही भला लगता है
तन्हाई जब साथ हो मेरे,कविता लिखना अच्छा लगता है
विचारों के पट खोल शब्द,रूबरू कागज के हुआ करता है
जीवन के छुए अनछुए पन्ने, पढ़ना कितना भला लगता है
जीवन संगीत का सुर जब.रोम-रोम में बसने लगता है
हर साज,हर आवाज़,फिर, सब कुछ यहाँ अपना लगता है
कविता के हर शब्द को,फिर अंतर्मन ही सुना करता है
भीगे पलकों को सबसे छुप , पोंछ लेना भला लगता है
हर्ष-विषाद की तिजोरी में,हर्ष का संचय ही भला लगता है
ख़ुशी भरे पलों के सहारे,सपने देखना बहुत अच्छा लगता है