Monday, November 7, 2011

soch gahri karo aur apne sakaratmak faisle lo

पेट्रोल के दाम बढ़ गए हैं लोगों में आक्रोश है पर इसके लिए कहीं हम भी कुछ प्रतिशत जिम्मेदार नहीं क्या?
१  हम में से कितने लोग कार-पूलिंग पर यकीन करते हैं? 
२  पैदल चल कर तय कर सकने योग्य दुरी को भी हम क्यों कार से ही करना पसंद करते हैं?
३   अगर घर में चार सदस्य हैं तो सब के लिए अलग गाड़ियाँ  क्यों ?
४   हम में से कितने लोग अपने कार्य स्थल पर पैदल जाना पसंद करते हैं अगर यह नजदीक हो ?
पेट्रोल के सीमित भंडार को सोच समझ कर प्रयोग करना क्या हमारी भी जिम्मेदारी नहीं है? शिक्षित समाज का कर्त्तव्य समस्या के समाधान खोजना होना ज्यादा उचित है बजाये इसके की हम व्यर्थ की बयानबाजी में समय बर्बाद करें आओ सोचें कि हमारा उत्तरदायित्व क्या है ?एक जागरूक नागरिक होने का यही समय है कि सरकार  की  मदद करें अगर हमने अपने स्तर में भी पेट्रोल बचाने की  कशिश की  तो भारत की इतनी बड़ी आबादी इस दिशा में कितना सहयोग देने में सक्षम हो जाएगी



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