कर्तव्यों के पथ पर चलते-चलते..........
छाले पड़े अधिकारों की ख्वाहिश में .
ज़मीन पर निगाहें टिकी रही बरसों
फुर्सत नहीं कि आसमां भी तलाश लूँ !
वेदना दुःख पीड़ा की चीत्कार में
दहेज़,भ्रूण ह्त्या जैसे अत्याचार में
खो ही तो रहा था मेरा अस्तित्व
नहीं.......बस और नहीं ....
अब तलाशुंगी अपना वजूद,
माजुँगी अपनी अन्तर्निहित शक्तियों को
बताउंगी ज़मीं से लेकर आसमां को
कि.....
क्या होता है स्त्री के मौन में छुपा रहस्य
क्या होता है स्त्री शक्ति का सही अर्थ .
छाले पड़े अधिकारों की ख्वाहिश में .
ज़मीन पर निगाहें टिकी रही बरसों
फुर्सत नहीं कि आसमां भी तलाश लूँ !
वेदना दुःख पीड़ा की चीत्कार में
दहेज़,भ्रूण ह्त्या जैसे अत्याचार में
खो ही तो रहा था मेरा अस्तित्व
नहीं.......बस और नहीं ....
अब तलाशुंगी अपना वजूद,
माजुँगी अपनी अन्तर्निहित शक्तियों को
बताउंगी ज़मीं से लेकर आसमां को
कि.....
क्या होता है स्त्री के मौन में छुपा रहस्य
क्या होता है स्त्री शक्ति का सही अर्थ .
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